पकिस्तातान मुर्दाबाद ............................... ये सिर्फ एक शब्द मात्र नही है। ये दर्द है एक सिंदूर मिटने का, ये बद्दुआ है एक गोद सूनी होने की, ये गुस्सा है एक बेसहारा होते बाप का, ये सिसकारी है एक अनाथ होते बच्चे की, ये गम है अपने बचपन से बिछड़ते भाई का, एक श्राप है उन हाथों का जो साल दर साल राखी बांधने का इंतजार करते है।
पाकिस्तान आये दिन हमारे जवानों से सीमा पर कायरतापूर्ण हमले करता है। कभी घात लगाये आतंकियों द्वारा, कभी अपने सैनिको द्वारा मोर्टार दाग कर, तो कभी बर्बरता पूर्वक सिर काटकर हमारे सैनिको को मारता है। दिन प्रतिदिन हमारे जवान सीमा पर शहीद होते है। हर रोज हमारी बहू बेटिया विधवा होती है। हर रोज हमारे देश मे कई चिताएं जलती है, कई ताबूत दफन होते है, कई जनाजे सुपुर्दे–खाक होते है। हर रोज हमारे सैनिक मारे जाते है।
हर रोज वो जवान हंसते हंसते शहीद हो जाते है, ताकि हम घरों मे सुरक्षित रह सकें।
हर रोज वो अपनी जान गंवाते है, ताकि हमें एक और मुस्कुराने का मौका दे सकें।
हर रोज वो मौत को गले लगाते है, ताकि हमारा देश सुरक्षित रह सके।
हर रोज वो मौत चुनते है, ताकि हमारे देश की अखंडता बनी रहे।
हर रोज वो पाकिस्तान से मरने या मारने के लिए तैयार रहते है, ताकि ये देश सुरक्षित रह सके और ये देशवासी सुरक्षित रह सके। इसीलिए शयाद पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलना देश भक्ती का सर्टिफिकेट नही पर उस मिटते सिंदूर का सुकून जरूर है।
ये सब जानते हुए भी तुम कहते हो कि जवान क्या करते है देश के लिए। जवान सीमा पर मरते है यही टेकनिकली सही है उन्हें शहीद का दर्जा मत दो। हर जवान पाकिस्तान नही मारता। वो पाकिस्तानी भी वही हमारे लिए सोंचते है जो हम उनके लिये सोंचते है। पाकिस्तान में सारे लोग गलत नही है। बस कुछ लोग ही सिर्फ गलत है। और अंत में कहते हो कि तुम पाकिस्तान मुर्दाबाद नही बोलोगे।
तो फिर जब हमारे सैनिक बर्बरता पूर्ण मारे जाते है, इसपर पकिस्तातान में कोई हरकत क्यो नही होती है जबकि हिंदुस्तान ऐसा बर्बर कृत्य [सैनिकों के सिर काटना] युद्ध तक में भी नही करता।
कोई पाकिस्तानी नेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सेना प्रमुख, या कोई और क्यो इस कृत्य की निंदा नही करता या इसके खिलाफ बोलने के बजाय अपने सैनिको और आतंकियों की पीठ क्यो थपथपाता है। भारत में आतंकी हमले होने और उसकी जिम्मेदारी पाक आतंकी संगठनों द्वारा लेने पर भी क्यो उस पर कर्यवाही नही होती है। अगर पाकिस्तान में सब लोग गलत नही है तो क्यों हर साल दर साल पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कम होती जा रही है। 1947 से अब तक हिन्दू 17 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पर सिमट गये है। पाक में हर साल 74 पीतिशत हिन्दू महिलाओं। पर अत्याचार होता है हर साल लगभग 300 हिन्दू लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर मुस्लिमो के साथ निकाह करवाया जाता है।
जब हम पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलते है तो तुम लोग क्यो यूनिट इन वर्ल्ड की बात करते हो। क्या पाकिस्तान से एकता हमारे जवानों की शहादत से बढ़ कर है। जब हम पाक को सबक सिखाने की बात करते है तो तुम्हे क्यो पूरे विश्व की शांति याद आती है। जब पाकिस्तान के बुरे की बात होती है तब ही क्यो एक समुदाय को इतना बुरा लगता है कि वो हमे ट्रोल करने लगते है।
कुछ ऐसे कंवर्जनिस्टों को भी तब ही क्यो बुरा लगता है जब हम पाकिस्तान के बारे में बोलते है जो दो पीढ़ी पहले तक कुछ और थे और अब कुछ और है (हिन्दू धर्म से धर्म परिवर्तन किये हुए लोग)।
जब हम अपने सैनिको के साथ हुई बर्बरता का बदला लेने की बात करते है तब ये समुदाय क्यो देश के अंदर ही युद्ध जैसा माहौल तैयार कर देते है। पाकिस्तान का नाम आते ही क्यो ये लोग आतंक का चोला ओढ़ कर कभी हथियार तो कभी पत्थर उठा लेते है।


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