भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या को लंदन में सकॉटलैंड यार्ड द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद भारत में उनके प्रत्यर्पण की कार्यवाही तेज हो गयी है।
गौरतलब है कि माल्या पर भारतीय बैंको का नौ हज़ार करोड़ का कर्ज न चुका पाने की बजह से भारत में उनपर कार्यवाही होनी संभव् थी।
कार्यवाही के मद्देनजर माल्या भारतीय सुरक्षा कंपनियों के ढीले रवैये की बजह से पिछले साल मार्च में देश छोड़कर लन्दन भागने में कामयाब हो गए थे।
माल्या के देश से भागने के बाद भारत में सत्ता धारी पार्टी बीजेपी ने अपनी छबि को बचाने के लिए माल्या पर सख्त कार्यवायी करते हुए उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया तथा माल्या की तमाम संपत्ति की नीलामी के आदेश भी दे दीये।
माल्या के विदेश भाग जाने के बाद भारत में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस अक्सर सत्ताधारी बीजेपी पर उनको भागने में मदद करने का आरोप लगाती रही है।
अब माल्या के गिरफ्तार हो जाने के बाद ये पासा उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।
गौर तलब है कि माल्या जब सन 2006 से 2008 के बीच पैसो के संकट से जूझ रहे थे तब उस समय की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने उन्हें लोन पास कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
सन 2011 में जब माल्या एक बार कई कर्जे में डूबे तब भी कांग्रेस् पार्टी ही सत्ता में थी तथा तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने माल्या की कंपनी किंग फिशर को न डूबने देने की बात कही थी।
अब जब लन्दन में माल्या की गिरफ़्तारी हो चुकी है तब इस सत्ताधारी पार्टी पर हमला बोलने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहती है ।
इस का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी ने उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री को विजय माल्या द्वारा लिखित एक पत्र तथा उसका जबाब ये बताते हुए सार्बजनिक किया है कि माल्या की मदद किस हद तक की गयी थी तथा कांग्रेस पार्टी ने कुस तरह से माल्या को फायदा पहुचाया है।
No comments:
Post a Comment