Thursday, 16 February 2017

रेज एक्ट; ये कैसी मित्रता,

20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद कुछ अमेरिका सीनटरो ने अमेरिकी संसद में एक विधेयक पेश किया,जो की अगर संविधान की शक्ल ले सकता है,तो न सिर्फ भारतियों को बल्कि पूरे विश्व के सभी देशों के नागरिको को अमेरिका में रहने के लिए और वहाँ नौकरी करने के लिये वहाँ जाने के लिए अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। H-1B वीजा धारकों की संख्या घट कर दस लाख से पांच लाख कर दी जायेगी।यह रेज एक्ट नामक एक विधयेक अगर पारित हो जाता है,तो अमेरिका में H-1B वीजा लेकर गए भारतियों की संख्या घट कर आधी हो जायेगी मतलब बड़ी संख्या में अमेरिका में नौकरी करने गए भारतियों ने भारी बहुमत देकर ट्रम्प के जीवन में अहम भूमिका निभाई,ट्रम्प के समर्थन में हवन यज्ञ से लेकर पूजा अर्चना भी करते थे।लेकिन शायद अब जब ट्रम्प राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए है,तब पहला तो उनकी रूस और पाकिस्तान जैसे देशों को लेकर शायद नीति ही साफ़ नहीं है,दूसरा जिन देशों पर उन्होंने प्रतिबन्ध लायेगें  वो देश,ईरान ,इराक,सीरिया,लीबिया,सोमालिया,यमन,सूडान में सिर्फ मुस्लिम आबादी ही नहीं बल्कि ईसाई आबादी भी बड़ी मात्रा में प्रभावित होगी तो इसे मुस्लिम विरोधी कदम मानना बेमानी होगी।और शायद अमेरिका में इन देशों के नागरिकों द्वारा अपराध में संल्पितता भी बहुत कम है। और जो देश अमेरिका में आतंक बढ़ा रहे है चाहे वो सऊदी अरब हो संयुक्त राज्य एमिरात,तुर्की या फिर पाकिस्तान या अफगानिस्तान हो अमेरिका ने इन पर कूटनीति दवाबों के चलते प्रतिबन्ध लगाने की हिम्मत नहीं जुटा सका है। और जो भारतीय ट्रम्प के लिए दिन रात एक करते थे सबसे ज्यादा कष्ट उन्ही को होने वाला है,और जो ओबामा के समय में भारत के साथ रिश्तों में गर्मजोशी आयी थी,उसे लेकर भारतियों के साथ-साथ ट्रम्प के मन में दुविधा जरूर होगी लेकिन चुनाव के समय ट्रम्प ने जो तोहफे भारतियों को देने का वादा किया था। जो दोस्ती का हाथ बढ़ाने का वादा किया था,वो शायद दूर होता नजर आ रहा है।।।

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